"This blog is dedicated to those who believe in love. Love never comes with smiles, its the pain that follows the inner emotions of love."
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Love is like...

katl hua humara...is tarah kishton mein..
kabhi khanzar badal gaye...kabhi kaatil badal gaye..

Thursday, April 30, 2009

MUST READ....wrriten by ADIL




याद है,
तुम और मैं
पहाड़ी वाले शहर की
लम्बी, घुमावदार,
सड़्क पर
बिना कुछ बोले
हाथ में हाथ डाले
बेमतलब, बेपरवाह
मीलों चला करते थे,
खम्भों को गिना करते थे,
और मैं जब
चलते चलते
थक जाता था
तुम कहती थीं ,
बस
उस अगले खम्भे
तक और ।

आज
मैं अकेला ही
उस सड़्क पर निकल आया हूँ ,
खम्भे मुझे अजीब
निगाह से
देख रहे हैं
मुझ से तुम्हारा पता
पूछ रहे हैं
मैं थक के चूर चूर हो गया हूँ
लेकिन वापस नहीं लौटना है
हिम्मत कर के ,
अगले खम्भे तक पहुँचना है
सोचता हूँ
तुम्हें तेज चलने की आदत थी,
शायद
अगले खम्भे तक पुहुँच कर
तुम मेरा
इन्तजार कर रही हो !

3 comments:

Anonymous said...

very nice Adil ,
Sach mein padh k ek pal liye toh rona aa gaya
Keep it up


By:-
Mannat

pras said...

yes chand, true

friend said...

hey adil..

the words u use n deepness in ur words are really touchin..just awesum..
keep goin da..